मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में बुधवार को कर्मयोगी बनें, सर्वोच्च परामर्शदायी समिति की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। यह कार्यशाला कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में उच्च शिक्षा विभाग एवं यूनाइटेड कांशियसनेस के सहयोग से हुई।
कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक, विकसित भारत बनाने की संकल्पना की सिद्धि के निमित्त, व्यापक परिवर्तन को लेकर समग्र विमर्श चल रहा है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में व्यापक क्रियान्वयन हो रहा है। इस अनुक्रम में प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों में जवाबदारी, स्वभाव के रूप में विकसित करने को लेकर, उच्च शिक्षा विभाग ‘कर्मयोगी बने’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्धता के साथ क्रियाशील है। परमार ने कहा कि हर स्तर पर जवाबदारी सुनिश्चित करने और व्यक्तित्व में उत्तरदायी स्वभाव के लिए कार्य-संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा में “कर्मयोगी बने” के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का वातावरण बदलेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कर्मयोगी बने विषय पर मंथन, तथा उच्च शिक्षा विभाग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकसीत भारत के साथ-साथ शासकीय सेवक को कर्मयोगी बनने की बात पर बल दिया। उन्होने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से ही दुनिया में ज्ञान एवं विज्ञान का प्रसार करता रहा है। कर्मयोगी अर्थ ही यही है कि जब तक सफलता नहीं मिले निरंतर कार्य करते रहना है। परमार ने कहा कि “कर्मयोगी” का भाव, भारत की परंपरा और संस्कृति में विद्यमान है। भारतीय समाज में, लक्ष्य प्राप्ति होने तक कार्य करने की परंपरा रही है। न केवल प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों में बल्कि हर नागरिक में, राष्ट्र और समाज के प्रति अपने योगदान और उत्तरदायित्व का भाव सुदृढ़ करना होगा, इसके लिए परिवर्तन की भावना से आगे बढ़ना होगा। परमार ने कहा कि प्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में, देश भर में अग्रणी है। “कर्मयोगी बने”, के परिप्रेक्ष्य में भी प्रदेश देश भर में अग्रणी भूमिका में रहे, इसके लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। सभी के संकल्पित प्रयासों एवं पुरुषार्थ से विकसित भारत@2047 की संकल्पना साकार हो सकेगी।















