सिंगरौली जिले के जियावन थाना क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार इस समय अपने चरम पर है, और इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कि जियावन थाना प्रभारी साहिबा, जो कुछ दिनों के लिए केवल ट्रेनिंग पर आई हैं, उनके कार्यकाल में रेत माफियाओं को ऐसी खुली छूट मिल गई है जैसी पहले कभी देखने को नहीं मिली। महज कुछ दिनों की तैनाती के दौरान ही उनकी निष्क्रियता, उदासीनता और कमजोर कार्यशैली ने पूरे क्षेत्र को अवैध रेत कारोबारियों के हवाले कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश की डीजीपी द्वारा जारी सख्त आदेशों के बावजूद जियावन थाना प्रभारी साहिबा ने न तो रेत माफियाओं पर कार्रवाई की और न ही किसी तरह का दबाव बनाया, जिससे जनता में यह सवाल उभर रहा है कि क्या वास्तव में ट्रेनिंग पर आईं साहिबा सरकार के आदेशों का पालन करने में सक्षम हैं या नहीं।
जियावन में ट्रेनिंग पर आई थाना प्रभारी साहिबा के सामने रेत माफिया बेलगाम
नदी से 24 घंटे अवैध रेत उत्खनन लगातार जारी है। हाईबा, ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें दिन-रात अवैध रेत निकालकर भंडारण स्थलों तक पहुंचा रही हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों पर जियावन थाना की प्रभारी साहिबा की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि थाने से कुछ ही दूरी पर रेत माफियाओं का जमावड़ा लगा रहता है, और वे खुलेआम ट्रैक्टर-डंपर लेकर थाने के सामने से गुजरते हैं, फिर भी ट्रेनिंग पर आईं प्रभारी साहिबा केवल मूकदर्शक बनी रहती हैं।
सीएम और डीजीपी के आदेश बेअसर – जियावन में अवैध खनन जारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव बार-बार स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि अवैध रेत खनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, रात में गश्त बढ़ाई जाए, वाहनों को जब्त किया जाए और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो। लेकिन जियावन में इन आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा है। ट्रेनिंग पर आईं थाना प्रभारी साहिबा पर आरोप है कि उन्होंने न तो गश्त बढ़ाई, न FIR दर्ज की, न माफियाओं के खिलाफ किसी तरह की सख्ती दिखाई। इससे जनता में यह सवाल उठ रहा है कि जब ट्रेनिंग के दौरान ही यह हाल है, तो स्थायी तैनाती होने पर हालात कैसे होंगे?
कुछ दिनों की ट्रेनिंग… लेकिन रेत माफियाओं को मिली खुली छूट
प्रदेश डीजीपी ने सभी जिलों के थानों को कड़ा निर्देश दिया था कि अवैध रेत खनन पर जीरो टॉलरेंस रखा जाए और लापरवाह अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन जियावन थाना प्रभारी साहिबा ने इन निर्देशों को तवज्जो नहीं दी। नतीजा यह कि रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि वे ग्रामीणों को धमकाने लगे हैं। तेज रफ्तार ट्रैक्टर और डंपर आम जनता और पशुओं की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, लेकिन ट्रेनिंग पर आई प्रभारी साहिबा पूरी तरह निष्क्रिय बनी हुई हैं।
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जियावन क्षेत्र की यह स्थिति अब प्रदेश स्तर पर सरकार की छवि के लिए बड़ा नुकसान बनती जा रही है। विपक्ष खुलकर यह सवाल उठा रहा है कि जब एक ट्रेनिंग पर आई महिला थाना प्रभारी भी मुख्यमंत्री और डीजीपी के आदेशों को नहीं मान रही हैं, तो फिर प्रदेश में कानून व्यवस्था कैसे मजबूत होगी?
शेष अगले अंक में



















