आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार, आयुष को निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री परमार ने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराएँ, विशेषकर आयुर्वेद, केवल उपचार प्रणाली नहीं बल्कि जीवन पद्धति हैं, जिनकी जड़ें प्रकृति एवं जैव-विविधता में निहित हैं। मंत्री परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश; अपने विशाल वन क्षेत्र, विविध जलवायु एवं समृद्ध औषधीय वनस्पति के कारण देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। प्रदेश में 7 हजार से अधिक औषधीय प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, हर्बल उद्योग एवं वेलनेस सेक्टर के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। मंत्री परमार आयुष विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड के औषधीय पादप डेस्क कैलेंडर–2026 एवं “मध्य हर्बल दर्पण” मासिक पत्रिका का विमोचन कर, संबोधित कर रहे थे।
मंत्री परमार ने कहा कि औषधीय पादप डेस्क कैलेंडर आमजन को वर्ष भर विभिन्न औषधीय पौधों की जानकारी देगा, वहीं “मध्य हर्बल दर्पण” पत्रिका शोध, नवाचार, किसान अनुभव, वैज्ञानिक लेख एवं नीति पहलों को एक मंच पर लाकर ज्ञान-साझाकरण को सशक्त बनाएगी। मंत्री परमार ने आयुष विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड की टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी।
प्रमुख सचिव आयुष शोभित जैन ने कहा कि विभाग द्वारा औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत खेती, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, मूल्य संवर्धन एवं विपणन तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। प्रमुख सचिव जैन ने कहा कि आयुष को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
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अपर सचिव आयुष एवं सीईओ मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड संजय मिश्र ने बताया कि बोर्ड द्वारा क्लस्टर आधारित खेती, किसान प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी, स्टार्ट-अप सहयोग तथा बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनों प्रकाशन औषधीय पादपों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाज तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


















