पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश थीम पर कुशभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में पंचायत प्रतिनिधियों एवं राज्य स्तरीय पदाधिकारियों की तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसी भी शासकीय अभियान की सफलता में पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास अभियानों में धुरी बनकर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन, सिंचाई विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में पाइपलाइन, टंकियों एवं फ़िल्टर प्लांटों का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिससे ‘नल से जल’ अब एक वास्तविकता बन चुका है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था समन्वय पर आधारित है। अधिकारों तथा कर्तव्यों के बीच संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सामंजस्य से पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए बैठकों, स्थाई समितियों और निर्णय प्रक्रियाओं को नियमित एवं प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिए स्थायी समितियों की नियमित रूप से बैठक होना चाहिए। सड़क निर्माण, शिक्षा और अन्य योजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जानकारी, मर्यादा और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को अपनी क्षमता बढ़ाने, नियमों की जानकारी लेने और अनुभव साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। कार्यशाला में जनपद और ग्राम पंचायतों को आय के स्रोत बढ़ाने, कार्यालय प्रबंधन एवं सामाजिक जागरूकता पर जनप्रतिनिधियों से चर्चा हुई। कार्यशाला के दौरान अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक श्री दिनेश जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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