विक्रम विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी अध्ययनशाला में “कांसेप्ट ऑफ़ सिग्नीफिकेशन इन स्ट्रक्चरलिज्म एंड पोस्टस्ट्रक्चरलिज्म: थ्योरी एंड प्रैक्टिस” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अध्ययनशाला के सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।इसमें मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच के प्राचार्य, प्रो. प्रशांत मिश्रा ने अपने विद्वत्तापूर्ण व्याख्यान से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया एवं स्ट्रक्चरलिज़्म और पोस्टस्ट्रक्चरलिज़्म की मूल अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि साहित्य में अर्थ स्थिर नहीं रहता, बल्कि भाषा, पाठ और पाठक के बीच संवाद से लगातार बदलता और विकसित होता है।प्रो. मिश्रा ने फर्डिनेंड डी सोस्यूर द्वारा प्रस्तुत सिग्नीफायर और सिग्नीफाईड की संकल्पना की अवधारणा समझाई। साथ ही उन्होंने जेक्स डेरीदा के डीकंस्ट्रक्शन सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहा कि हर पाठ में कई संभावित अर्थ छिपे रहते हैं, जिन्हें पाठक अलग-अलग दृष्टिकोण से समझ सकता है। इसी क्रम में रोलां बार्थ के रीडरली / राइटेरली टेक्स्ट की अवधारणाओं को उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया तथा जॉन कीट्स की कविताओं का पोस्टस्ट्रक्चरलिस्ट दृष्टिकोण से विश्लेषण किया।कार्यक्रम के शुभारंभ पर स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो. अंजना पांडेय ने दिया। प्रो. बी. के. आंजना ने प्रो. मिश्रा की शैक्षणिक यात्रा से विद्यार्थियों को प्रेरित किया। संचालन मिति शर्मा ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रियंका शक्तावत ने व्यक्त किया।
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