असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से मंगोलिया लेकर पहुंचे। मंगोलिया पहुंचने पर हवाई अड्डे पर मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एल.एंख-अमगलान तथा गंडनतेगचेनलिंग मठ के मुख्य महंत खाम्बा नोमुन खान गेशे ल्हारम्पा डी. जावज़ानदोरज ने उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। पवित्र अवशेषों के यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से नमन कर अपनी आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य के साथ अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत एवं श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित रहा। समारोह में मंगोलिया के विभिन्न प्रमुख मठों के महंत, अनेक बौद्ध भिक्षु तथा मंगोलिया के पूर्व (तीसरे) राष्ट्रपति नामबारिन एंखबयार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप में संरक्षित भगवान बुद्ध के परम शिष्यों अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए मंगोलिया
भेजा गया है। गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक किया जाएगा, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर प्राप्त होगा।यह पहल केवल आध्यात्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेगी।
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