सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायन सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी अधिकारी-कर्मचारी समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। विभाग के मैदानी अमले की योजनाओं और कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर उतारने में भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए, योजनाओं को लागू करने के साथ नीति निर्माण में उनके सुझाव को कैसे शामिल किया जा सकता है इस विषय पर विस्तृत विचार विमर्श के लिये सामाजिक न्याय विभाग द्वारा विभागीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग मानवीय संवेदनाओ से जुड़ा विभाग है। इसके माध्यम से हम कमजोर और असहाय लोगों की सहायता कर सकते है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन की सेवा ईश्वर सेवा से कम नहीं है।
मंत्री कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुँचे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि विभागीय योजनाओं के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाई जाए, जिससे अधिक से अधिक पात्र हितग्राही लाभान्वित हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिंतन शिविर में विभागीय कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि जिलों में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए। साथ ही, हितग्राहियों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए विभाग सतत प्रयासरत है। अधिकारियों को सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए जनसमस्याओं का संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है।
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