माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश एवं मुख्य सचिव की 5वीं कॉन्फ्रेंस के अनुक्रम में बुधवार को, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में भोपाल स्थित पलाश रेसीडेंसी के सभागार में राज्य के समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की बैठक हुई। बैठक में मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर, आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में उच्च शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 15 जनवरी 2026 को क्रिमिनल अपील क्रमांक 1425 में पारित आदेश के अनुपालन में निर्णय लिया गया कि किसी भी छात्र की आत्महत्या अथवा अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी मिलते ही संबंधित शैक्षणिक संस्थान द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा, चाहे घटना संस्थान परिसर के भीतर हुई हो या बाहर। इसके अतिरिक्त, ऐसी घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एवं संबंधित नियामक संस्थाओं को प्रस्तुत करना भी आवश्यक होगा।
बैठक में मंत्री परमार ने कहा कि आवासीय शैक्षणिक संस्थान में 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए अथवा निकटतम एक किलोमीटर की परिधि में ऐसी सुविधा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लंबे समय से रिक्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों को चार माह की अवधि में भरने तथा आरक्षित वर्गों के पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। परमार ने कहा कि छात्रों की सभी लंबित छात्रवृत्तियों का समयबद्ध निराकरण किया जाए तथा छात्रवृत्ति में विलंब के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा, कक्षा, हॉस्टल अथवा डिग्री/मार्कशीट से वंचित न किया जाए। श्री परमार ने शैक्षणिक संस्थाओं को UGC के सभी बाध्यकारी विनियमों, विशेषकर रैगिंग निरोधक व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति एवं छात्र शिकायत निवारण तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया जाये।
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