मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दमोह जिले ने बीते कुछ वर्षों में खेती-किसानी में एक अलग ही पहचान बना ली है। बुंदेलखंड की वीरभूमि, धर्म, संस्कृति और आस्था की धरती को नमन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां से मोह न छूटे, वो अपना दमोह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। खेत से लेकर बाज़ार तक और खाद से लेकर किसानों के खातों तक हम पक्की और स्थायी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने परिश्रम से उत्पादित अनाज का एक-एक दाना हमारे लिए भगवान के प्रसाद समान है। हमारे लिए अन्न का दाना-दाना अनमोल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान और ज्वार-बाजरा के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन मंगलवार, 15 सितम्बर से प्रारंभ हो गया है। यह काम 10 अक्टूबर तक चलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से दमोह जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार तथा अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई ने मंत्रालय में हुई वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले के किसानों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि हमारी सरकार अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। हर सुख-दुख में हम सब हमेशा किसानों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण, नई तकनीक, नवाचार, उद्यानिकी, प्राकृतिक-जैविक खेती तथा गौपालन सहित अन्य दुधारू पशुओं का पालन एवं मछली पालन व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने का आह्वान किया।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में लगभग 6 लाख 72 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में खेती हो रही है। इसमें से 86 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित है। दमोह का चना देशभर में प्रसिद्ध है। खाद्य प्रसंस्करण तथा एग्रो प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी इस जिले में नई-नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। किसान गेहूं, चना और धान के साथ ही हाई-वैल्यू क्रॉप की ओर भी बढ़ रहे हैं। दमोह जिले में अश्वगंधा की खेती के प्रोत्साहन के लिए 100 से अधिक किसानों को निःशुल्क बीज एवं कृषि प्रशिक्षण दिया गया है। दमोह जिले में अगले खरीफ सीजन में मखाने का उत्पादन भी नवाचार के रूप में शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में पशुपालन को तेजी से बढ़ावा मिल रहा हैयहां बीते एक साल में 9 नई दुग्ध सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में जिले के 65 गांवों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना में जिले में 14 स्वच्छ फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना दमोह जिले के लिए वरदान बनने जा रही है। उन्होंने बताया कि तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपए से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना से दमोह जिले के 17 से अधिक गांवों की करीब 3 हजार 600 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। सतधरु मध्यम सिंचाई परियोजना, पारना जलाशय निर्माण और दादपुर स्टाप डेम का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हमारी सरकार ने दमोह जिले की सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाकर अब 1.35 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य लिया है।


















