मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “ई-जीरो FIR” व्यवस्था लागू की गई है। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए साईं मनोहर के नेतृत्व में देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 54 लाख 84 हजार 725 रुपए की ठगी गई राशि बरामद की है।
जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र के नागरिक से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 लाख 52 हज़ार रुपए की साइबर ठगी की शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त हुई थी। प्रकरण में थाना कोतवाली देवास में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर देवास पुलिस द्वारा विशेष टीम गठित कर साइबर ठगी की राशि से जुड़े बैंकिंग ट्रांजेक्शन, खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, बैंक शाखाओं के सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान प्रत्येक बैंकिंग लेयर का तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण करते हुए पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची।
ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का लगातार पीछा करते हुए देवास पुलिस की 19 टीमों में शामिल 70 पुलिसकर्मियों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, दिल्ली सहित कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में स्थानीय पुलिस के समन्वय से संदिग्ध खाताधारकों एवं आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। इस अंतरराज्यीय कार्रवाई के दौरान पुलिस टीमों ने लगातार 127 दिनों तक आरोपियों की तलाश, बैंक खातों की जांच, बैंक शाखाओं से तकनीकी साक्ष्य संकलन तथा संदिग्धों की गतिविधियों का सत्यापन किया। इस दौरान टीमों ने लगभग 58 हजार 315 किलोमीटर की दूरी तय की और विभिन्न राज्यों में समन्वित कार्रवाई करते हुए नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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