एमएसएमई की आज सोमवार से प्रारंभ हुई आई.पी. यात्रा में अधिकारियों और उद्योग परिसंघ के पदाधिकारियों ने ट्रेडमार्क और पेटेंट के रजिस्ट्रेशन बढ़ाने पर मिलकर काम करने की जरूरत बताई है। वक्ताओें की राय थी कि देश में 7 करोड़ एमएसएमई रजिस्टर्ड है किन्तु पटेंट और ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन काफी कम है।
भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर द्वारा सीएसआई भोपाल के सहयोग से दो दिवसीय ‘आईपी यात्रा ” कार्यक्रम सोमवार से एम्प्री भोपाल में प्रारंभ हुआ। एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर के संयुक्त निदेशक नीरज अरोड़ा ने आईपी यात्रा कार्यक्रम के उद्देश्य एवं उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों से यात्रा में आने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों का लाभ उठाने का अनुरोध किया एवं एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। सहायक निदेशक राजकुमार मोहनानी ने बताया कि देश में 7 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाईयाँ रिजस्टर्ड हैं किन्तु इसके अनुपात में ट्रेडमार्क और पेटेंट के रजिस्ट्रेशन बहुत कम प्रतिशत में हैं। आईपी यात्रा का उद्देश्य यही है कि रजिस्ट्रेशन बढ़ाने में एमएसएमई, रिसर्चरस, स्टार्टअप्स की जागरूकता में वृद्धि हो।
एमएसएमई विकास कार्यालय के सहायक निदेशक एवं आईपी यात्रा कार्यक्रम के समन्वयक निलेश त्रिवेदी ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय के द्वारा आईपी अधिकारों की सुरक्षा के लिए फॉरेन पेटेंट लेने पर 05 लाख, डोमेस्टिक पेटेंट पर 01 लाख, जीआई पर 02 लाख, डिजाइन पर 15 हजार एवं ट्रेडमार्क प्राप्त करने पर 10 हजार रूपये की सब्सिडी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की सिप योजना के अंतर्गत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एवं फेसिलिटेशन सेंटर के एनपेनलमेंट सहयोग प्रदान किया जाता है। त्रिवेदी ने पेटेंट, ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया एवं विभिन्न केस स्टडी की भी जानकारी प्रदान की।
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