मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों ने रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में जारी आधिकारिक सूचियों से किसान मोर्चा और विभिन्न प्रकोष्ठों में जिला अध्यक्षों व संयोजकों की तैनाती की पुष्टि हुई है। हालांकि, इन नियुक्तियों के बीच अल्पसंख्यक मोर्चे की खामोशी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां प्रवक्ता कर्नल इशान इसे उचित समय का निर्णय बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे आपसी खींचतान का नतीजा करार दे रही है। बाकी मोर्चों में पदों के भरने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या अल्पसंख्यक मोर्चे में चेहरों के चयन को लेकर कोई आंतरिक गतिरोध है?
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