मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के पावन पर्व पर इंदौर में आयोजित राज्य स्तरीय शस्त्र-पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शस्त्र पूजन भारतीय सनातन संस्कृति, शौर्य, शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए जीवन जीने की प्रेरणा देती है। शस्त्र धारण करना केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के कष्ट दूर करने, नागरिकों की रक्षा करने और व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के पावन पर्व पर इंदौर पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में सहभागिता कर शौर्य, पराक्रम और राष्ट्र रक्षा की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन किया। इस अवसर पर उन्होंने मां कालका की आराधना की तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परंपरागत तलवार, भाला सहित अत्याधुनिक एके-47 और अन्य अस्त्र-शस्त्रों का विधि-विधान से पूजन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस वाहन, अश्वों का पूजन करने के साथ शस्त्रागार का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में उन्होंने कन्या पाद पूजन भी किया। कार्यक्रम में उन्हें महिला पुलिस दल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस समारोह में धार्मिक आस्था, शौर्य परंपरा और जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का समन्वय देखने को मिला।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय तथा मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध के माध्यम से नारी शक्ति के सामर्थ्य का संदेश देता है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की परंपरा से समृद्ध सनातन संस्कृति हमारे संस्कारों और जीवनशैली को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। हमारी परंपरा में शस्त्र को भी तिलक लगाकर श्रद्धा और पवित्रता के साथ पूजने का विधान है। यह शस्त्र के प्रति सम्मान के साथ उसके जिम्मेदार उपयोग की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास वीरों के त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण से निर्मित हुआ है। देश के वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता के मान-सम्मान की रक्षा की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर स्वर्णिम भविष्य की ओर अग्रसर है।
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