मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन का परमात्मा ने भाग्य विशेष रूप से लिखा है। जो भी व्यक्ति एक बार उज्जैन आता है, उसका जीवन संवर जाता है। मां शिप्रा के पावन तट पर बसी यह नगरी अनादि काल से अस्तित्व में है और हर युग में इसकी महिमा अक्षुण्ण रही है। उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से जाना जाता था, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। वर्षप्रतिपदा के इस विशेष दिन विक्रम संवत 2083 के आगमन का उल्लास पूरे शहर में देखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को विक्रमोत्सव-2026 अंतर्गत उज्जैन के राम घाट पर आयोजित सृष्टि आरंभ उत्सव का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जब दुनिया आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन का उपयोग युद्ध में कर रही है, वहीं ड्रोन तकनीक उज्जैन में देवी-देवताओं की झलक आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है। यह सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है। करीब दो हजार वर्ष पूर्व उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर राष्ट्र की रक्षा की और सुशासन की मिसाल कायम की। उनका 32 पुतलियों वाला सिंहासन, नवरत्नों की विद्वता, वीरता और दानशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। आज विक्रमादित्य की इसी गौरवगाथा को पुनर्जीवित करते हुए पूरे प्रदेश में विक्रमोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक आदर्शों की पुनर्स्थापना का प्रतीक भी है।
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