कन्दा वन धन विकास केन्द्र जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक बन गया है। दक्षिण पन्ना में स्किल इस केन्द्र ने म.प्र. में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया है।
केंद्र द्वारा इस वर्ष लगभग 21.4 लाख रुपये का रिकॉर्ड राजस्व एवं लगभग 5 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है, जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक तथा लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। पूर्व वर्षों में केंद्र का राजस्व एवं लाभ क्रमशः वर्ष 2021-22 में 6.5 लाख रुपये एवं 17 हजार रुपये, वर्ष 2022-23 में 4.7 लाख रुपये एवं 67 हजार रुपये, वर्ष 2023-24 में 2.6 लाख रुपये एवं 63 हजार रुपये और वर्ष 2024-25 में 5.1 लाख रुपये एवं 22 हजार रुपये रहा था। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों का परिणाम मानी जा रही है।
वन-धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय जनजातीय संग्राहकों को लघुवनोपज का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक प्राप्त हो रहा है। इसमें अचार/चिरौंजी चरवा का समर्थन मूल्य 130 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि गुणवत्ता के आधार पर संग्राहकों को वन-धन केंद्र के माध्यम से लगभग 160 रुपये से 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हुआ। बाद में इसी उपज का प्रसंस्करण, डीसीडिंग, सफाई एवं आकर्षक पैकेजिंग कर “कल्दा चिरौंजी” ब्रांड के रूप में विपणन किया गया। इस पहल से स्थानीय संग्राहकों की आय में वृद्धि हुई है तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।
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वन-धन विकास केंद्र की गतिविधियों से विशेष रूप से जनजातीय महिला सदस्यों को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। कई महिला सदस्य, जिन्हें पूर्व में कोई आय प्राप्त नहीं होती थी, वे वर्तमान में वन-धन केंद्र से जुड़कर लगभग 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, जिससे जनजातीय महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिली है।


















