भोपाल में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के जन्मदिन के अवसर पर पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित किया गया। लेखक कृष्णमोहन झा की कृति ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ का विमोचन पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने किया। कार्यक्रम में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इमाम के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी और महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि भी मौजूद रहे।भोपाल के विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने किया। इस मौके पर ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इमाम के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी और महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि भी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भी शिरकत कीपुस्तक विमोचन समारोह में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि आमतौर पर पुस्तक किसी एक विषय या किसी एक व्यक्तित्व पर केंद्रित होती है… लेकिन ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा अलग-अलग विषयों पर व्यक्त किए गए विचारों का संकलन किया गया है…. उन्होंने कहा कि यह संकलन महज विचारों का संग्रह नहीं है, बल्कि उनके विचारों का विश्लेषण और निष्कर्ष भी प्रस्तुत करता है…
वही डॉ. वार्ष्णेय ने कहा कि आजकल ‘जेन जी’ शब्द का काफी इस्तेमाल हो रहा है, जबकि संघ लगातार युवाओं के साथ संवाद करता रहा है। उन्होंने डॉ. मोहन भागवत के उन विचारों का भी उल्लेख किया, जिनमें शहरों की ओर बढ़ते पलायन और श्रम की प्रतिष्ठा जैसे मुद्दों पर बात की गई है…. उन्होंने कहा कि समाज में श्रम को जितनी प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, उतनी दिखाई नहीं दे रही है… साथ ही उन्होंने संघ को समझने के लिए उसके साथ लंबे समय तक निस्वार्थ भाव से जुड़कर काम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया…वहीं, पुस्तक विमोचन समारोह में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इमाम के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी ने कहा कि आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत हमेशा संवाद में विश्वास रखते हैं। उन्होंने डॉ. भागवत को विराट व्यक्तित्व का धनी बताया। अपने विदेश दौरों का जिक्र करते हुए इलियासी ने कहा कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि भारत को मुसलमानों की दृष्टि से कैसे देखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए सिर्फ मुसलमानों के नजरिए से नहीं, बल्कि पूरे भारत को समझना जरूरी है। साथ ही डॉ. इलियासी ने पुस्तक के लेखक कृष्णमोहन झा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रयास समाज में मौजूद कई गलतफहमियों को दूर करने में मदद कर सकता है समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने भी पुस्तक और उसके लेखक की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस कृति में डॉ. मोहन भागवत के राष्ट्रचिंतन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को न सिर्फ संकलित किया गया है, बल्कि उन्हें एक अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। अखंड भारत के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह संवाद और विचारों के माध्यम से संभव होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब बर्लिन की दीवार टूटकर एक देश बन सकता है, तो अखंड भारत क्यों नहीं।वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुस्तक के लेखक कृष्णमोहन झा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन भागवत सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं और उनके विशाल सागर जैसे विचारों को इस पुस्तक में संजोने का काम किया गया है।पुस्तक के लेखक कृष्णमोहन झा ने बताया कि इस पुस्तक के सृजन में कई लोगों की भूमिका रही है। अलग-अलग विषयों पर डॉ. मोहन भागवत के भाषणों और वक्तव्यों पर लेख लिखे गए। इसके बाद इन विचारों को एक साथ संकलित कर प्रस्तुत करने का विचार आया और इसी प्रयास का परिणाम ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ पुस्तक के रूप में सामने आया
भोपाल में आयोजित इस पुस्तक विमोचन समारोह में डॉ. मोहन भागवत के राष्ट्रचिंतन से लेकर सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण तक के विचारों को केंद्र में रखा गया। लेखक कृष्णमोहन झा की इस कृति में उनके विभिन्न विचारों और संदेशों को एक साथ संकलित किया गया है। कुल मिलाकर, ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ पुस्तक डॉ. मोहन भागवत के राष्ट्र और समाज से जुड़े विचारों को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास है। भोपाल में हुए इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही।
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