मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हमें जीवन दें, सद्मार्ग पर ले जाए, वह सदैव वंदनीय है। हमारे लिए प्रकृति ही परमेश्वर के स्वरूप है, क्योंकि यह हमें जीवन देती है, हमारा उदर-पोषण करती है। इसलिए हम सबको प्रकृतिपूजक बनकर इसकी वंदना करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी। वृक्ष ऋषि मुनियों के समान एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। यह हमारी नकारात्मक ऊर्जा को स्वयं ग्रहण कर हमें सकारात्मक ऊर्जा (प्राण वायु) देने वाले उदार साधक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर भूमि को हरियाली की चादर ओढ़ाना प्रकृति माता को हरी चुनरी ओढ़ाने जैसा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर चलाया जा रहा है ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान कोई शासकीय कार्यक्रम नहीं, ये जीवन के लिए सांसों का स्थायी प्रबंध करने का अभियान है। जल, जंगल, जमीन और जानवर जिनसे हमारा पारिस्थितिकीय-तंत्र तैयार होता है, यह अभियान इनकी सुरक्षा का मिशन है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर जिले के ग्राम बुढ़ानिया स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) परिसर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां अपनी पूजनीय माता स्व. श्रीमती लीला बाई यादव की स्मृति में संतरे का फलदार पौधा लगाकर इन्दौर में 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना (निर्माण) कार्य के महाभियान का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पंच महाभूतों का मान्यता मिली है। इसमें सबसे प्रमुख है जल। जल से ही हमारा जीवन है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान तथा जल, जंगल एवं पर्यावरण बचाने के पुनीत महाभियान में पूरे समाज की सहभागिता बेहद सराहनीय है। हम सबको मिलकर इस दिशा में आगे आना ही चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधरोपण एवं जल संचयन में सरकार और समाज की सहयोगी सामाजिक संस्था पृथ्वी को प्रोत्साहन स्वरूप 2 लाख रुपये और प्रदेश में चलाए गए नक्सल उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले बीएसएफ के दो जवानों को मंच से सम्मानित कर 2-2 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
सम्बंधित ख़बरें


















